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| साभार oddstuffmagazine.com |
सुनो
कहो
कुछ बात है
कुछ तो नहीं
आज गजब ढा रही हो
और तुम चुप रहीं।
और तुम चुप रहीं।
चलो
नहीं
क्यों
बस ऐसे ही
फिर कभी मत आना
और तुम सहम गईं।
क्यों
बस ऐसे ही
फिर कभी मत आना
और तुम सहम गईं।
मैं फिर आया
तुम्हें राहत मिली
अभी भी नहीं
और तुम कुछ नहीं बोलीं
मैंने कहा, ऐसे
और तुम वैसे
मैंने कहा, ऐसे नहीं ऐसे
और तुम वैसे ही
मैं कहता गया
तुम करती गईं
हर बार
अपनी आत्मा का दम घोंटकर
क्योंकि मैं पुरूष था
तुम स्त्री।
तुम्हें राहत मिली
अभी भी नहीं
और तुम कुछ नहीं बोलीं
मैंने कहा, ऐसे
और तुम वैसे
मैंने कहा, ऐसे नहीं ऐसे
और तुम वैसे ही
मैं कहता गया
तुम करती गईं
हर बार
अपनी आत्मा का दम घोंटकर
क्योंकि मैं पुरूष था
तुम स्त्री।
------------@ प्रदीप
