तुम्हारी
हसरतों का
एक पिटारा है
मेरे पास
जो खुलता रहता है
जब और तब।
मालूम है तुम्हें
इन हसरतों का
मेरी चाहतों से
कोई वास्ता नहीं,
किसी सपेरे के पिटारे
के मानिंद
हसरतें सिर उठाती रहती हैं
नागफनियों की तरह,
और तैयार रहती हैं हमेशा
डसने को
नहीं तो कम से कम
भय तो पैदा ही करती हैं
डसे जाने का।
किसी बच्चे की मानिंद
मैं भी छिटककर दूर
खड़ा हो जाता हूं
बढ़ी हुई धड़कनों के साथ
और जब पिटारा
बंद होता है
तो आ खड़ा होता हूं
फिर से
तुम्हें समझने की उत्सुकता में
हसरतों के दोबारा
बाहर आने तक।
--------------------@ प्रदीप
एक पिटारा है
मेरे पास
जो खुलता रहता है
जब और तब।
मालूम है तुम्हें
इन हसरतों का
मेरी चाहतों से
कोई वास्ता नहीं,
किसी सपेरे के पिटारे
के मानिंद
हसरतें सिर उठाती रहती हैं
नागफनियों की तरह,
और तैयार रहती हैं हमेशा
डसने को
नहीं तो कम से कम
भय तो पैदा ही करती हैं
डसे जाने का।
किसी बच्चे की मानिंद
मैं भी छिटककर दूर
खड़ा हो जाता हूं
बढ़ी हुई धड़कनों के साथ
और जब पिटारा
बंद होता है
तो आ खड़ा होता हूं
फिर से
तुम्हें समझने की उत्सुकता में
हसरतों के दोबारा
बाहर आने तक।
--------------------@ प्रदीप